लघुचित्र, डायरी, वीडियो, बातचीत : इस अनुभाग में बताया गया हर एक काम आपको हमारे और हमारे काम के करीब लाता है। यह हमारे सामने मौजूद चुनौतियाँ बताते हैं, जिन्हें हमने अपने उद्देश्य के करीब आने के लिए पार की हैं
हमारी तीन परिचालन इकाइयाँ हैं – फील्ड संस्थान, फ़िलंथ्रोफ़ी और विश्वविद्यालय। यह तीनों एकजुट तरीके से फ़ाउण्डेशन के उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती हैं। एक न्यायसंगत, समतामूलक, मानवीय और सस्टेनबल समाज की दिशा में योगदान देना फ़ाउण्डेशन का उद्देश्य है। हम आपके लिए तीनों इकाइयों से, सीधे भारत भर में हमारे लोगों और भागीदारों से कहानियों का एक संग्रह लाए हैं। कहानियों के इस संग्रह में वीडियो, एनीमेशन, साक्षात्कार और पत्रिकाएँ मौजूद हैं। यह हमारे कार्य के विभिन्न क्षेत्रों में फ़ाउण्डेशन की यात्रा और प्रभाव को प्रदर्शित करती हैं।
नक्षत्रगळु। भाग 11। सैम्युअल, कुरैशी मोहल्ला स्कूल, सुरपुर, यादगिर । उमाशंकर पिरियोडी
जब सैम्युअल बतौर हेडमास्टर इस स्कूल में आए थे, तब यहाँ बमुश्किल 2 बच्चे आया करते थे। इस मुकाम से शुरु हुए इस सफ़र को सैम्युअल ने लगभग 100 बच्चों तक ले आए। सैम्युअल की जी-जान लगाकर की गई मेहनत ने कुरैशी मोहल्ला स्कूल को न सिर्फ़ शिक्षा का केंद्रीय स्थान बनाया, बल्कि शिक्षा के ज़रिए बदलाव की आशा की किरण को भी जगा दिया है।
नक्षत्रगळु। भाग 10। सुमलता कांबली, बागलकोट, कर्नाटक । उमाशंकर पिरियोडी
सुमलता कांबली पिछले 11 वर्षों से बतौर शिक्षिका काम कम कर रही हैं। इन वर्षों में उन्होंने अपनी सूझबूझ और कड़ी मेहनत से एक उपेक्षित स्कूल के आत्मविश्वास गँवा चुके विद्यार्थियों की ज़िंदगी को ख़ुशहाली से भर दिया। उन्होंने इस स्कूल को एक ख़ुशनुमा शिक्षण की जगह में तब्दिल कर दिया।
कोरोना में स्कूल की पढ़ाई: उत्तराखण्ड से शिक्षा के अनुभव
कोविड-19 के दौरान लगभग दो वर्षों तक स्कूल बंद रहे। इस मुश्किल घड़ी में बच्चों की पढ़ाई और सीखने में बड़ा संकट देखा गया। इस महामारी की मुश्किल घड़ियों में बच्चों का सीखना और पढ़ाई जारी रखने के लिए उत्तराखण्ड के शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले कई कार्यकर्ताओं ने अपने प्रयासों को जारी रखा।
नक्षत्रगळु। भाग 09। उमाशंकर पेरियोडी के साथ हूडलुमाने उच्च प्राथमिक स्कूल की सफलता की कहानी।
यह स्कूल उत्तर कनाडा ज़िले के सिद्दापुर तहसील में अपनी सेवाएँ दे रहा है। एक पिछड़े गाँव में स्थित होने के बावजूद नंजुदैय्या समिति की रिपोर्ट में इस स्कूल को ‘उत्कृष्टता का प्रतीक’ कहा गया है।
नक्षत्रगळु, भाग 8। उमाशंकर पेरियोडी की वाणी एम.एल. (मांड्या, कर्नाटक) से बातचीत
नक्षत्रगळु के आठवें भाग में एक ऐसी शिक्षिका की कहानी प्रस्तुत की जा रही है, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपने स्कूल की कायापलट कर दी है। इस शिक्षिका से हमें उमाशंकर पेरियोडी मिला रहे हैं। उमाशंकर अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के कर्नाटक राज्य के हेड हैं।
नक्षत्रगळु । भाग 07 । व्यंकटेश डी.एस., मांड्या, कर्नाटक के साथ उमाशंकर पिरियोडी
नक्षत्रगळु के इस सातवे भाग में उमाशंकर पिरियोडी एक शिक्षक की कहानी बता रहा हैं। यह कहानी कर्नाटक के मांड्या ज़िले के पांडवपुरा तहसिल के एक शिक्षक के दृढ़ संकल्प और धैर्य की दास्तान है। इस कहानी से जाने कि किस तरह वेंकटेश डी.एस. का बदलाव के प्रति उत्साह, उनके गाँव की आजीविका और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाता है।
नक्षत्रगळु । भाग 06। शिवबसप्पा, माण्ड्या, कर्नाटक
यह नक्षत्रगळु का छठा एपिसोड है। इसमें अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के कर्नाटक हेड उमाशंकर पिरिओडी हमें एक शिक्षक के धैर्य और संकल्प भरे सफ़र पर ले जा रहे हैं। यह कहानी शिवबसप्पा की है, जो हुलिकेरे हायर प्राइमरी स्कूल, मांड्या में शिक्षक हैं। अभी सुनें।
नक्षत्रगळु । भाग 05 । धर्म विष्णु नायक, उत्तर कनाडा, कर्नाटक
नक्षत्रगळु के इस पाँचवे भाग में धर्म विष्णु नायक की कहानी सुना रहे हैं। धर्म विष्णु नायक कर्नाटक के उत्तर कन्नड ज़िले के एक स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने अपने स्कूल में दी जाने वाली शिक्षा को बदलाव की लहर से गुज़ारा है।
विषयगत क्षेत्र: स्कूल शिक्षा प्रदर्शन कार्यशाला – अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन, बाड़मेर
इस तरह की प्रदर्शन कार्यशालाएं शिक्षक समुदाय को सार्थक शैक्षणिक चर्चाओं के माध्यम से एक-दूसरे का पूरक बनने, मदद करने और एक-दूसरे से सीखने का अवसर देती हैं। यह शिक्षक क्षमता निर्माण में योगदान देती हैं, जो राजस्थान के बाड़मेर में सभी ब्लॉकों में आयोजित लगातार प्रशिक्षण सत्रों को आधार प्रदान करती हैं।












