लघुचित्र, डायरी, वीडियो, बातचीत : इस अनुभाग में बताया गया हर एक काम आपको हमारे और हमारे काम के करीब लाता है। यह हमारे सामने मौजूद चुनौतियाँ बताते हैं, जिन्हें हमने अपने उद्देश्य के करीब आने के लिए पार की हैं
हमारी तीन परिचालन इकाइयाँ हैं – फील्ड संस्थान, फ़िलंथ्रोफ़ी और विश्वविद्यालय। यह तीनों एकजुट तरीके से फ़ाउण्डेशन के उद्देश्य को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती हैं। एक न्यायसंगत, समतामूलक, मानवीय और सस्टेनबल समाज की दिशा में योगदान देना फ़ाउण्डेशन का उद्देश्य है। हम आपके लिए तीनों इकाइयों से, सीधे भारत भर में हमारे लोगों और भागीदारों से कहानियों का एक संग्रह लाए हैं। कहानियों के इस संग्रह में वीडियो, एनीमेशन, साक्षात्कार और पत्रिकाएँ मौजूद हैं। यह हमारे कार्य के विभिन्न क्षेत्रों में फ़ाउण्डेशन की यात्रा और प्रभाव को प्रदर्शित करती हैं।
नक्षत्रगळु । भाग 17 । आनंद चिन्नप्पा, हिडगळी तांडा, विजयपुरा। उमाशंकर पिरियोडी
आनंद ने पढ़ाने को सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे एक जीवंत अनुभव बना दिया। कभी वह भालू नाचने वाले का भेष धरकर बच्चों को चौंका देते, तो कभी उनकी ही भाषा सीखकर उनसे दिल से जुड़ जाते। पढ़ाई उनके लिए खेल भी थी और सीख भी। बीस सालों से चल रही आनंद की यह यात्रा हमें सिखाती है कि सच्चा शिक्षक वही है, जो बच्चों के दिल तक पहुँचे और उन्हें जीवनभर याद रहने वाला सीखने का अनुभव दे।
नक्षत्रगळु । भाग 16 । राजेश्वरी कालमनी, बिदर । उमाशंकर पिरियोडी
राजेश्वरी कालमनी बिदर ज़िले के चावगी उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। उन्होंने विद्यालय को बेहतरीन बनाने का बीड़ा उठाया। इसके तहत उन्होंने रचनात्मक ढंग से पढ़ाना शुरु किया, विद्यालय में एक पुस्तकालय शुरु किया, प्रिंट-समृद्ध नाली कली कक्षाएँ विकसित कीं और विद्यालय के परिसर को आकर्षक और सुंदर बनाया। उनके द्वारा किए गए बदलाव की कहानी यहाँ सुनें।
नक्षत्रगळु। भाग 15। मंजुनाथ एच.एन., होम्मीनला । उमाशंकर पिरियोडी
यह मंजुनाथ नाम के शिक्षक की कहानी है। उन्होंने कुछ ही समय में अपनी कोशिशों से एक सामान्य स्कूल को बेहतरीन प्रक्रियाओं वाला और संसाधनयुक्त स्कूल में तब्दील कर दिया है।
मेहनती शिक्षकों के जीत के तरीके
यहाँ ग्रामीण कर्नाटक में काम करने वाले 12 बेहतरीन शिक्षकों के सम्मान प्रदर्शित किया गया है। इन सम्माननीय शिक्षकों ने अपनी मेहनत और लगन से यह दिखा दिया है कि शिक्षा प्रदान करने के लिए व्यक्ति की इच्छा-शक्ति का होना कितना ज़रूरी है।
नक्षत्रगळु। भाग 14। मैलरलिंगाा, नंदीहल्ली । उमाशंकर पिरियोडी
मेलर एक स्कूल शिक्षक हैं। उन्होंने फैसला लिया कि वे उसी गाँव में रहने लगेंगे, जिस गाँव के स्कूल में वे पढ़ाया करते थे। इससे वे अपने स्कूल और स्कूल के बच्चों को पहले से ज़्यादा समय दे सकते हैं। इसी वजह से वे अन्य शिक्षक साथियों के साथ मिलकर कूल में पाइप से पानी पहुंचाने का काम कर पाए और एक बेहतरीन लाइब्रेरी भी खड़ी कर पाए।
नक्षत्रगळु। भाग 13। आरती, देवपुरा उमाशंकर पेरियोडी
आरती ने अपनी मेहनत, समर्पण और बिलकुल नए नज़रिए से काम करते हुए एक स्कूल का कायपलट कर दिया। उन्होंने एक बेहद ख़राब प्रदर्शन कर रहे स्कूल को बेहतर प्रदर्शन करने वाला संस्थान में बदल दिया। उनके प्रयासों से यह स्कूल जाग उठा और अब इस स्कूल के बच्चे संपूर्ण विकास के सफ़र में आगे बढ़ रहे हैं।
Alumni Story | From Textbooks to Transformation – Rethinking Education in Rural India
Can Education go beyond textbooks, theories and pragmatics to truly transform lives? Chandan (MA in Education, 2017-19) uses his academic foundation to critically engage with the public education system and develop contextual solutions.
नक्षत्रगळु। भाग 12। निर्मला रेवानागोला, कलबुर्गी । उमाशंकर पिरियोडी
इस भाग में निर्मला की कहानी प्रस्तुत की गई है। निर्मला जी हरिजनवाड़ा उच्च प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका हैं। यह स्कूल कलबुर्गी ज़िले के सेडाम ब्लॉक की कडेचेर्ला बस्ती में बसा एक साधारण स्कूल था। निर्मला जी के प्रयासों से यह अनदेखा कर दिया गया यह स्कूल अब अपने इलाके का सफ़ल और बेहतरीन स्कूल माना जाने लगा है।
तरंग: आंगनवाड़ी मेला, बाड़मेर
राजस्थान के बाड़मेर में आंगनवाड़ी मेला आयोजित किया गया। यह मेला शिक्षकों के साथ आकर अपने अनुभव बाँटने और सीखने का बेहतरीन अवसर बनकर उभरा है।

असुंता दीदी: स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसे को बनाए रखने वाली दीदी (सिस्टर)
देश के दूर-दराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ संसाधनों से बढ़कर यहाँ के स्वास्थ्य-कर्मियों के अथक प्रयासों एवं विश्वसनीयता के चलते सक्रिय हैं। यह कहानी ऐसे ही विश्वासों को बनाए रखते घटनाओं के साक्ष्य प्रस्तुत करती है।











